पुरुषोत्तम मास की सोमवती अमावस्या के पावन अवसर पर बद्रीपुर में चल रही श्रीमद् भागवत कथा के तीसरे दिन राष्ट्रीय संत एवं प्रख्यात कथा वाचक डॉ. दुर्गेश आचार्य ने श्रद्धालुओं को संबोधित किया। इस दौरान उन्होंने कहा कि जब मनुष्य अपने भीतर स्थित आत्मा को परमात्मा से जोड़ लेता है, तो जीवन में स्थायी आनंद और शांति की अनुभूति होती है।कथा के दौरान उन्होंने श्रीमद् भागवत को केवल धार्मिक ग्रंथ न बताते हुए इसे जीवन जीने की कला और आध्यात्मिक मार्गदर्शक बताया। उन्होंने कहा कि यह ग्रंथ व्यक्ति को सही आचरण, सद्भाव और समाज में संतुलित जीवन जीने की प्रेरणा देता है।प्रवचन में उन्होंने समाज में व्याप्त अन्याय और शोषण पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि जो लोग दूसरों का शोषण करते हैं, वे नैतिक रूप से गलत मार्ग पर चल रहे होते हैं। साथ ही उन्होंने उत्तराखंड की धरती को देवभूमि बताते हुए यहां जन्म लेने को सौभाग्यपूर्ण बताया।डॉ. आचार्य ने भक्ति मार्ग को श्रेष्ठ बताते हुए कहा कि इस मार्ग पर चलने वाला व्यक्ति सभी जीवों में समान भाव रखता है और ऊंच-नीच जैसे भेदभाव से ऊपर उठ जाता है। उन्होंने समाज में नारी सम्मान पर जोर देते हुए कहा कि नारी शक्ति का स्वरूप है और उसके सम्मान से ही समाज का उत्थान संभव है।उन्होंने यह भी कहा कि बेटियां परिवार और समाज की धरोहर हैं, जो तीन पीढ़ियों के कल्याण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। अपने संबोधन के अंत में उन्होंने कहा कि आज भारत विश्व मंच पर एक मजबूत और मार्गदर्शक राष्ट्र के रूप में आगे बढ़ रहा है।कथा के मंडपाचार्य रमेश चंद्र पैन्यूली ने बताया कि इस श्रीमद् भागवत कथा का आयोजन श्रीमती शकुंतला नौटियाल एवं श्रीमती ऊषा नौटियाल द्वारा किया जा रहा है। कथा श्रवण के लिए राज्य के विभिन्न हिस्सों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित हो रहे हैं।
आत्मा और परमात्मा की एकता से मिलता है शाश्वत आनंद : डॉ. दुर्गेश आचार्य
June 16, 2026
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