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यूपीसीएल को मिला नया नेतृत्व, पीसी ध्यानी ने संभाली जिम्मेदारी; यूजेवीएनएल के एमडी बने ए.के. सिंह

उत्तराखंड के ऊर्जा निगमों को मिले नए एमडी, यूपीसीएल की जिम्मेदारी पीसी ध्यानी और यूजेवीएनएल की कमान ए.के. सिंह कोदेहरादून। उत्तराखंड सरकार ने राज्य के ऊर्जा क्षेत्र में लंबे समय से खाली पड़े शीर्ष पदों पर नियुक्तियां करते हुए दो प्रमुख ऊर्जा निगमों को नया नेतृत्व सौंप दिया है। सरकार ने पीसी ध्यानी को उत्तराखंड पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड (यूपीसीएल) का प्रबंध निदेशक (एमडी) नियुक्त किया है, जबकि ए.के. सिंह को उत्तराखंड जल विद्युत निगम लिमिटेड (यूजेवीएनएल) का नया प्रबंध निदेशक बनाया गया है। इन नियुक्तियों के साथ ही दोनों निगमों में स्थायी नेतृत्व को लेकर चल रहा इंतजार समाप्त हो गया है।सूत्रों के अनुसार, मुख्य सचिव की अध्यक्षता वाली चयन समिति ने बुधवार को एमडी पद के लिए दावेदार अधिकारियों का साक्षात्कार लिया। विभिन्न पहलुओं पर विचार-विमर्श के बाद सरकार ने देर शाम दोनों अधिकारियों के नामों को मंजूरी दे दी। नियुक्ति आदेश जारी होने के बाद दोनों अधिकारी जल्द ही अपने-अपने पदों का कार्यभार संभालेंगे।ऊर्जा विभाग में लंबे समय से स्थायी नेतृत्व का अभाव महसूस किया जा रहा था। इससे कई महत्वपूर्ण प्रशासनिक और विकास संबंधी निर्णयों पर भी असर पड़ने की चर्चा रही। अब नए प्रबंध निदेशकों की नियुक्ति के बाद ऊर्जा परियोजनाओं के संचालन, बिजली वितरण व्यवस्था और विभागीय कार्यों में तेजी आने की उम्मीद की जा रही है।यूपीसीएल राज्यभर में विद्युत वितरण, उपभोक्ता सेवाओं और बिजली आपूर्ति का जिम्मा संभालता है, जबकि यूजेवीएनएल जल विद्युत परियोजनाओं के विकास, संचालन और बिजली उत्पादन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। ऐसे में दोनों संस्थानों में नए नेतृत्व को राज्य के ऊर्जा क्षेत्र के लिए अहम माना जा रहा है।विशेषज्ञों का मानना है कि नए एमडी के सामने बिजली व्यवस्था को अधिक प्रभावी बनाना, लाइन लॉस में कमी लाना, राजस्व वसूली को मजबूत करना, लंबित परियोजनाओं को गति देना और उपभोक्ताओं को बेहतर सेवाएं उपलब्ध कराना प्रमुख प्राथमिकताएं होंगी। साथ ही भविष्य की बढ़ती ऊर्जा जरूरतों को ध्यान में रखते हुए निगमों की कार्यक्षमता बढ़ाने पर भी विशेष जोर रहेगा।सरकार के इस फैसले को ऊर्जा क्षेत्र में प्रशासनिक मजबूती की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि नए नेतृत्व में दोनों ऊर्जा निगम किस तरह अपनी कार्यप्रणाली को बेहतर बनाते हैं और राज्य की ऊर्जा व्यवस्था को नई गति देने में कितने सफल साबित होते हैं।

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