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बदरीनाथ में बागेश्वर बाबा का बड़ा बयान: “पेपर लीक की सजा छात्रों को नहीं, सिस्टम को मिलनी चाहिए

उत्तराखंड के पवित्र बदरीनाथ धाम में आयोजित श्री सत्यनारायण कथा के दौरान बागेश्वर धाम सरकार के प्रमुख पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने नीट (NEET) परीक्षा में पेपर लीक के मुद्दे पर खुलकर अपनी बात रखी। उन्होंने परीक्षा प्रणाली पर सवाल उठाते हुए कहा कि यदि किसी परीक्षा का पेपर लीक होता है तो इसकी सजा मेहनत करने वाले छात्रों को नहीं, बल्कि जिम्मेदार व्यवस्था और सिस्टम को मिलनी चाहिए।

कथा के दौरान उन्होंने कहा कि देश के लाखों छात्र-छात्राएं वर्षों तक कठिन परिश्रम कर मेडिकल प्रवेश परीक्षा की तैयारी करते हैं। उनके माता-पिता अपनी सामर्थ्य से बढ़कर खर्च करते हैं, कर्ज लेते हैं और अनेक त्याग करते हैं ताकि उनके बच्चे डॉक्टर बन सकें। ऐसे में पेपर लीक जैसी घटनाएं केवल एक परीक्षा को प्रभावित नहीं करतीं, बल्कि हजारों परिवारों के सपनों पर भी चोट पहुंचाती हैं।

उन्होंने विद्यार्थियों को निराश न होने की सलाह देते हुए कहा कि संघर्ष और धैर्य ही सफलता की असली कुंजी हैं। इस दौरान उन्होंने एक प्रेरणादायक चौपाई का उल्लेख करते हुए छात्रों का मनोबल बढ़ाने का प्रयास किया। उन्होंने कहा कि हाल ही में कुछ छात्र उनसे मिलने पहुंचे थे, जो परीक्षा से जुड़े विवादों के कारण मानसिक रूप से परेशान थे।

अपने संबोधन में उन्होंने व्यंग्यात्मक अंदाज में कहा, “पेपर लीक हो जाते हैं, लेकिन चुनाव नहीं।” इस टिप्पणी के बाद कथा स्थल पर मौजूद लोगों के बीच चर्चा शुरू हो गई। उन्होंने कहा कि यदि व्यवस्था में कहीं कमी है तो उसकी जिम्मेदारी भी व्यवस्था को ही लेनी चाहिए।

बागेश्वर सरकार ने सुझाव दिया कि यदि किसी परीक्षा में प्रशासनिक या तंत्र की गलती के कारण पेपर लीक होता है तो उसका बोझ छात्रों पर नहीं डाला जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि ऐसी परिस्थितियों में दोबारा परीक्षा देने वाले विद्यार्थियों की फीस माफ करने जैसे कदमों पर विचार किया जाना चाहिए, ताकि छात्रों और उनके परिवारों पर अतिरिक्त आर्थिक दबाव न पड़े।

उन्होंने कहा कि देश के अनेक परिवार खेती, मजदूरी और सीमित संसाधनों के बावजूद बच्चों की शिक्षा पर निवेश करते हैं। इसलिए परीक्षा प्रणाली को अधिक पारदर्शी, सुरक्षित और जवाबदेह बनाने की आवश्यकता है, ताकि युवाओं का विश्वास बना रहे और उनकी मेहनत का उचित सम्मान हो सके।

कथा के दौरान दिए गए इस बयान को लेकर श्रद्धालुओं और विद्यार्थियों के बीच व्यापक चर्चा देखने को मिली। शिक्षा व्यवस्था, परीक्षा की निष्पक्षता और छात्रों के भविष्य को लेकर उठाए गए उनके सवालों ने एक बार फिर परीक्षा प्रणाली में सुधार की जरूरत को चर्चा के केंद्र में ला दिया है।

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