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गंभीर स्वास्थ्य और पारिवारिक कारणों को मिली प्राथमिकता, विशेष मामलों के तबादलों को मंजूरी

मानवीय आधार पर शिक्षकों के तबादलों को मंजूरी, सुगम-दुर्गम स्थानांतरण पर अभी इंतजारदेहरादून। उत्तराखंड सरकार ने माध्यमिक शिक्षा विभाग में लंबित स्थानांतरण मामलों के निस्तारण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाया है। शासन स्तर पर जारी निर्देशों के तहत गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं, दिव्यांगता, पारिवारिक परिस्थितियों और अन्य विशेष मामलों से जुड़े स्थानांतरण आवेदनों पर नियमानुसार कार्रवाई का रास्ता साफ कर दिया गया है।शासन की ओर से जारी निर्देशों में कहा गया है कि वार्षिक स्थानांतरण अधिनियम-2017 के तहत गठित समिति द्वारा जिन मामलों की संस्तुति की गई है, उनका निस्तारण निर्धारित नियमों के अनुरूप किया जाए। इसके लिए संबंधित अधिकारियों को आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं।समिति ने माध्यमिक शिक्षा विभाग के विभिन्न पदों पर कार्यरत शिक्षकों और अधिकारियों के उन आवेदनों पर विचार किया, जो गंभीर बीमारी, दिव्यांगता, मानसिक या शारीरिक रूप से अस्वस्थ आश्रितों की देखभाल, विधवा या विधुर होने, तलाकशुदा अथवा परित्यक्ता स्थिति, आपदा प्रभावित परिवारों तथा माता-पिता की गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं जैसे कारणों से प्रस्तुत किए गए थे। ऐसे मामलों में अनुरोध आधारित स्थानांतरण की प्रक्रिया आगे बढ़ाने की सिफारिश की गई है।हालांकि, सुगम और दुर्गम क्षेत्रों के बीच होने वाले स्थानांतरणों को लेकर फिलहाल स्थिति यथावत बनी हुई है। इस श्रेणी से जुड़े मामलों पर अभी अंतिम निर्णय नहीं लिया गया है। बताया गया है कि संबंधित विषय न्यायालय में विचाराधीन होने के कारण शासन स्तर पर फिलहाल कोई नई कार्रवाई नहीं की जा रही है।सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि इस विषय पर कार्मिक एवं सतर्कता विभाग से आवश्यक राय प्राप्त होने के बाद आगे की प्रक्रिया तय की जाएगी। विभागीय अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि लंबित मामलों का निस्तारण नियमानुसार और निर्धारित समय सीमा के भीतर सुनिश्चित किया जाए।शिक्षा विभाग के कर्मचारियों और शिक्षकों के लिए यह निर्णय राहत भरा माना जा रहा है, विशेष रूप से उन लोगों के लिए जो लंबे समय से स्वास्थ्य या पारिवारिक कारणों के आधार पर स्थानांतरण की मांग कर रहे थे।

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