देहरादून कैंट बोर्ड एक बार फिर भर्ती प्रक्रिया को लेकर विवादों में घिरता नजर आ रहा है। कैंट बोर्ड के अस्पताल में मेडिकल ऑफिसर (डॉक्टर) पद पर नियुक्ति के लिए जारी चयन प्रक्रिया पर कई गंभीर सवाल खड़े किए जा रहे हैं। आरोप है कि कुछ विशेष अभ्यर्थियों को लाभ पहुंचाने के उद्देश्य से भर्ती नियमों में बदलाव किए गए हैं, जिससे चयन प्रक्रिया की पारदर्शिता पर प्रश्नचिह्न लग गया है।
जानकारी के अनुसार पूर्व में मेडिकल ऑफिसर पद के लिए जारी विज्ञापन में अभ्यर्थियों के लिए न्यूनतम तीन वर्ष का कार्यानुभव अनिवार्य रखा गया था। हालांकि बाद में अनुभव संबंधी शर्त को दरकिनार किए जाने के आरोप लगे, जिसके बाद मामले की शिकायत उच्च अधिकारियों तक पहुंची थी। शिकायत का संज्ञान लेते हुए तत्कालीन मुख्य अधिशासी अधिकारी (सीईओ) द्वारा चयन प्रक्रिया पर रोक लगा दी गई थी।
अब एक बार फिर उसी पद के लिए भर्ती प्रक्रिया शुरू होने के बाद विवाद सामने आया है। आरोप है कि इस बार विज्ञापन से अनुभव की अनिवार्यता को ही हटा दिया गया है। कुछ अभ्यर्थियों का दावा है कि यह बदलाव एक विशेष उम्मीदवार को लाभ पहुंचाने के उद्देश्य से किया गया है। हालांकि इस संबंध में कैंट बोर्ड की ओर से कोई आधिकारिक स्पष्टीकरण सामने नहीं आया है।
विवाद को और बढ़ाने वाली बात यह है कि चयन प्रक्रिया में ऐसे अभ्यर्थियों के नाम भी शामिल होने की चर्चा है, जिनकी शैक्षणिक योग्यता मेडिकल ऑफिसर पद के लिए निर्धारित आवश्यक योग्यता से मेल नहीं खाती। इसको लेकर अभ्यर्थियों और स्थानीय लोगों के बीच भर्ती प्रक्रिया की निष्पक्षता पर सवाल उठ रहे हैं।
पारदर्शी भर्ती प्रक्रिया की मांग कर रहे अभ्यर्थियों का कहना है कि पूरे मामले की स्वतंत्र जांच कराई जानी चाहिए ताकि सभी तथ्यों को सार्वजनिक किया जा सके। उनका कहना है कि यदि नियमों में बदलाव किए गए हैं तो उसके पीछे के कारणों को भी स्पष्ट किया जाना चाहिए।
मामले को लेकर विभिन्न स्तरों पर शिकायतें किए जाने की चर्चा है। वहीं भर्ती प्रक्रिया से जुड़े विवादों के बीच कैंट बोर्ड प्रशासन की कार्यप्रणाली भी सवालों के घेरे में आ गई है। अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि संबंधित विभाग और उच्च अधिकारी इस मामले में क्या कदम उठाते हैं तथा भर्ती प्रक्रिया को लेकर उठे सवालों का जवाब कैसे दिया जाता है।




