उत्तराखंड के मूल निवासी और उत्तरकाशी के पूर्व जिलाधिकारी रहे वरिष्ठ आईएएस अधिकारी केके पंत को हिमाचल प्रदेश प्रशासन में बड़ी जिम्मेदारी मिली है। राज्य सरकार ने उन्हें हिमाचल प्रदेश के मुख्य सचिव का अतिरिक्त प्रभार सौंपा है। उनकी नियुक्ति को प्रदेश के प्रशासनिक ढांचे में महत्वपूर्ण बदलाव के रूप में देखा जा रहा है।
1993 बैच के आईएएस अधिकारी केके पंत वर्तमान में हिमाचल प्रदेश सरकार में वन, गृह और सतर्कता जैसे महत्वपूर्ण विभागों की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं। मुख्य सचिव संजय गुप्ता के सेवानिवृत्त होने के बाद राज्य सरकार ने प्रशासनिक नेतृत्व की जिम्मेदारी केके पंत को सौंपी है। वरिष्ठता के आधार पर भी वे शीर्ष प्रशासनिक अधिकारियों में शामिल रहे हैं और अब राज्य के सबसे वरिष्ठ आईएएस अधिकारियों में उनका नाम प्रमुखता से लिया जा रहा है।
केके पंत का प्रशासनिक अनुभव तीन दशकों से अधिक का रहा है। अपने लंबे करियर के दौरान उन्होंने हिमाचल प्रदेश में कई महत्वपूर्ण पदों पर कार्य किया है। इसके अलावा केंद्र सरकार में प्रतिनियुक्ति के दौरान भी उन्होंने विभिन्न मंत्रालयों और विभागों में अहम जिम्मेदारियां निभाई हैं। कांगड़ा के जिलाधिकारी के रूप में उनका कार्यकाल भी काफी चर्चित और सफल माना जाता है।
उत्तराखंड से उनका विशेष नाता रहा है। उत्तरकाशी के जिलाधिकारी रहते हुए वर्ष 2003 में वरुणावत भू-स्खलन जैसी बड़ी आपदा के दौरान उन्होंने राहत और पुनर्वास कार्यों का प्रभावी नेतृत्व किया था। संकट की उस घड़ी में उनकी कार्यशैली, त्वरित निर्णय क्षमता और प्रशासनिक दक्षता की व्यापक सराहना हुई थी।
प्रशासनिक हलकों में माना जा रहा है कि केके पंत के नेतृत्व में हिमाचल प्रदेश की नौकरशाही को नई दिशा मिल सकती है। आपदा प्रबंधन, प्रशासनिक सुधार और विभागीय समन्वय के क्षेत्र में उनके अनुभव का लाभ राज्य को मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।
सूत्रों के अनुसार आने वाले समय में हिमाचल प्रदेश प्रशासन में कुछ महत्वपूर्ण बदलाव भी देखने को मिल सकते हैं। वर्तमान में उनके पास मौजूद विभिन्न विभागों के कार्यभार का पुनर्वितरण भी किया जा सकता है। ऐसे में उनकी नियुक्ति को केवल नियमित प्रशासनिक प्रक्रिया नहीं, बल्कि राज्य शासन व्यवस्था में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
लंबे प्रशासनिक अनुभव, कुशल नेतृत्व और संकट प्रबंधन की क्षमता के लिए पहचान रखने वाले केके पंत के सामने अब हिमाचल प्रदेश के प्रशासनिक संचालन की बड़ी जिम्मेदारी होगी, जिससे राज्य के विकास और सुशासन को नई गति मिलने की उम्मीद की जा रही है।



