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उत्तराखंड में मौसम ने रोकी पर्वतारोहियों की राह, उत्तरकाशी में 136 और बागेश्वर में 43 लोग फंसे; कल आठ हेलीकॉप्टर संभालेंगे मोर्चा

देहरादून। उत्तराखंड के ऊंचाई वाले क्षेत्रों में खराब मौसम के चलते पर्वतारोहण अभियान प्रभावित हुआ है। उत्तरकाशी और बागेश्वर जिलों में अलग-अलग ट्रेकिंग एवं पर्वतारोहण दलों के सदस्य मौसम खराब होने के कारण निर्धारित स्थानों से आगे नहीं बढ़ पा रहे हैं। प्रशासन ने सभी लोगों को सुरक्षित निकालने के लिए बड़े स्तर पर रेस्क्यू ऑपरेशन की तैयारी शुरू कर दी है।

आपातकालीन केंद्र पहुंचे मुख्य सचिव

राज्य के मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन ने रविवार देर शाम राज्य आपातकालीन परिचालन केंद्र पहुंचकर पर्वतारोहियों की स्थिति और चल रही तैयारियों की जानकारी ली। उन्होंने संबंधित अधिकारियों से रेस्क्यू ऑपरेशन की प्रगति पर चर्चा करते हुए निर्देश दिए कि खराब मौसम के बीच फंसे सभी लोगों को सुरक्षित बाहर निकालने के लिए पूरी क्षमता के साथ अभियान चलाया जाए।

आपदा प्रबंधन विभाग के सचिव विनोद कुमार सुमन ने बैठक में बताया कि उत्तरकाशी में 10 अलग-अलग ट्रेकिंग दलों के 136 पर्वतारोही विभिन्न स्थानों पर रुके हुए हैं। वहीं बागेश्वर में तीन दलों के 43 पर्वतारोहियों को एहतियातन सुरक्षित स्थानों पर रोका गया है।

सैटेलाइट फोन से लगातार संपर्क

उत्तरकाशी के जिलाधिकारी प्रशांत आर्य के अनुसार, फंसे हुए सभी पर्वतारोही फिलहाल सुरक्षित हैं। प्रशासन की ओर से सैटेलाइट संचार के जरिए उनसे लगातार संपर्क बनाए रखा जा रहा है।

जिला आपदा प्रबंधन विभाग के मुताबिक, पर्वतारोही कालिंदी ट्रैक पास, उड़न कॉल पास, माउंट सुदर्शन, भागीरथी-2, जोगिन-1, शिवलिंग-1 व 2, सतोपंथ और श्रीकंठ जैसी चोटियों के आरोहण के लिए निकले थे। ये दल सितंबर महीने के दौरान अलग-अलग तारीखों में अपने अभियानों पर रवाना हुए थे।

सोमवार सुबह छह बजे से हवाई रेस्क्यू

प्रशासन ने पर्वतारोहियों को सुरक्षित निकालने के लिए हवाई अभियान की तैयारी पूरी कर ली है। मुख्य सचिव ने सोमवार सुबह छह बजे से आठ हेलीकॉप्टरों के जरिए रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू करने के निर्देश दिए हैं।

यूकाडा को पर्याप्त हेलीकॉप्टरों की व्यवस्था सुनिश्चित करने को कहा गया है। साथ ही मौसम विभाग से लगातार जानकारी लेने और मौसम की स्थिति के अनुसार रेस्क्यू प्लान में बदलाव करने के निर्देश दिए गए हैं।

रेस्क्यू के बाद होगी मेडिकल जांच

मुख्य सचिव ने कहा कि पर्वतारोहियों को सुरक्षित स्थान पर पहुंचाने के बाद उनकी स्वास्थ्य स्थिति की तत्काल जांच की जाए। इसके लिए सभी संबंधित विभागों को पहले से तैयारी रखने के निर्देश दिए गए हैं।

एम्स ऋषिकेश और श्रीनगर मेडिकल कॉलेज को अलर्ट मोड पर रखा जाएगा, ताकि किसी पर्वतारोही की तबीयत खराब होने पर उसे बिना देरी के आवश्यक चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराई जा सके। रेस्क्यू टीमों के लिए सैटेलाइट फोन की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित करने को भी कहा गया है।

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