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जिलाधिकारी का सख्त संदेश: सरकारी योजनाओं की होगी पड़ताल, होमस्टे नियमों का पालन जरूरी

उत्तरकाशी में सरकारी योजनाओं की समीक्षा, डीएम ने लाभार्थियों के सत्यापन और होमस्टे मानकों पर दिया जोरउत्तरकाशी। जिलाधिकारी प्रशांत आर्य ने मंगलवार को कलेक्ट्रेट सभागार में पर्यटन विभाग, जिला उद्योग केंद्र और जिला ग्रामोद्योग से जुड़ी विभिन्न सरकारी योजनाओं की विस्तृत समीक्षा की। बैठक के दौरान उन्होंने योजनाओं की जमीनी प्रगति का आकलन करते हुए अधिकारियों को निर्देश दिए कि सरकारी लाभ केवल वास्तविक और पात्र लोगों तक ही पहुंचे। इसके लिए सभी लाभार्थियों का गहन सत्यापन सुनिश्चित किया जाए।जिलाधिकारी ने कहा कि ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में स्वरोजगार के अवसर बढ़ाने वाली योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन प्राथमिकता के आधार पर किया जाए, ताकि अधिक से अधिक युवाओं और जरूरतमंद लोगों को लाभ मिल सके।समीक्षा बैठक में पर्यटन विभाग की योजनाओं की प्रगति पर भी विस्तार से चर्चा हुई। अधिकारियों ने बताया कि दीन दयाल उपाध्याय गृह आवास विकास योजना के तहत निर्धारित 28 लक्ष्यों के मुकाबले 26 नए आवेदन प्राप्त हुए हैं। वहीं ट्रैकिंग-ट्रैक्शन सेंटर होमस्टे योजना में तय लक्ष्य 30 से अधिक 32 आवेदन मिले हैं। इसके अलावा वीरचंद्र सिंह गढ़वाली पर्यटन स्वरोजगार योजना के अंतर्गत वाहन और गैर-वाहन श्रेणी में कुल 16 आवेदन प्राप्त हुए हैं।जिला उद्योग केंद्र द्वारा संचालित मुख्यमंत्री स्वरोजगार योजना 2.0 और प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम (PMEGP) की उपलब्धियों की भी समीक्षा की गई। अधिकारियों ने बताया कि मुख्यमंत्री स्वरोजगार योजना 2.0 के अंतर्गत विनिर्माण क्षेत्र के लिए ₹25 लाख तथा सेवा एवं व्यवसाय के लिए ₹10 लाख तक ऋण की सुविधा उपलब्ध है। साथ ही महिलाओं, ग्रामीण उद्यमियों, दिव्यांगजनों और स्थानीय उत्पादों से जुड़े आवेदकों को 5 प्रतिशत अतिरिक्त वित्तीय प्रोत्साहन भी दिया जा रहा है।बैठक में यह भी बताया गया कि प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम के तहत 13 नई व्यावसायिक इकाइयों की स्थापना की गई है। इन परियोजनाओं में ₹109.08 लाख का निवेश हुआ, जबकि ₹36.53 लाख की सब्सिडी प्रदान की गई। इससे 78 लोगों को प्रत्यक्ष रोजगार मिला है।जिलाधिकारी प्रशांत आर्य ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि दीन दयाल उपाध्याय गृह आवास विकास योजना के अंतर्गत पंजीकृत सभी होमस्टे का भौतिक सत्यापन किया जाए। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह सुनिश्चित किया जाए कि संबंधित गृहस्वामी या उसका परिवार वास्तव में वहीं निवास करता हो और होमस्टे में पार्किंग की समुचित व्यवस्था भी उपलब्ध हो।उन्होंने यह भी कहा कि होमस्टे योजनाओं में पारंपरिक पहाड़ी वास्तुकला और स्थानीय संस्कृति को बढ़ावा देने वाले प्रस्तावों को प्राथमिकता दी जाए। साथ ही जिला पर्यटन विकास अधिकारी को मुख्यमंत्री की घोषणा के अनुरूप बौखनाग टिब्बा को पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करने की प्रक्रिया में तेजी लाने के निर्देश दिए।बैठक के अंत में जिलाधिकारी ने सभी विभागों को निर्देशित किया कि जनकल्याणकारी योजनाओं का संचालन पूरी पारदर्शिता और तय समय सीमा के भीतर किया जाए। उन्होंने चेतावनी दी कि आवेदन निस्तारण में किसी भी प्रकार की अनावश्यक देरी या लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी।इस समीक्षा बैठक में जिला पर्यटन विकास अधिकारी खुशाल नेगी, प्रभारी महाप्रबंधक जिला उद्योग केंद्र वैभव कुमार, जिला समाज कल्याण अधिकारी अतुल आनंद सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी मौजूद रहे।

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