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भूमि खरीद मामले में प्रशासन सख्त, कई अधिकारियों समेत 10 लोगों पर मुकदमे की संस्तुति

हरिद्वार भूमि प्रकरण में कार्रवाई तेज, कई अधिकारियों पर गिरी गाजहरिद्वार नगर निगम की चर्चित भूमि खरीद मामले में राज्य सरकार ने सख्त रुख अपनाते हुए कई अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की है। इस प्रकरण में तत्कालीन नगर आयुक्त वरुण चौधरी समेत कई अधिकारियों को पहले ही निलंबित किया जा चुका है। इसके बाद मामले की तह तक पहुंचने के लिए विशेष जांच और वित्तीय ऑडिट कराया गया, जिसमें कई महत्वपूर्ण तथ्य सामने आए।मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने साफ शब्दों में कहा है कि भ्रष्टाचार और वित्तीय अनियमितताओं के मामलों में किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा। उन्होंने कहा कि सरकार की प्राथमिकता पारदर्शी प्रशासन, जवाबदेही और जनहित की रक्षा करना है। यदि कोई अधिकारी या कर्मचारी नियमों का उल्लंघन करते हुए पाया जाता है तो उसके खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाएगी।राज्य सरकार की इस पहल को उत्तराखंड में भ्रष्टाचार के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान की बड़ी कार्रवाई के रूप में देखा जा रहा है। सरकार का कहना है कि सार्वजनिक धन के दुरुपयोग और पद के गलत इस्तेमाल को किसी भी सूरत में स्वीकार नहीं किया जाएगा।क्या है पूरा मामला?हरिद्वार नगर निगम द्वारा सराय क्षेत्र में करीब 33 बीघा भूमि खरीदने का मामला विवादों में आया था। आरोप है कि जिस भूमि का बाजार मूल्य काफी कम था और जो कचरा निस्तारण क्षेत्र के समीप स्थित थी, उसे लगभग 54 करोड़ रुपये की भारी कीमत पर खरीदा गया। जांच में इस खरीद प्रक्रिया में नियमों की अनदेखी और वित्तीय अनियमितताओं के संकेत मिले।जांच में क्या सामने आया?मामले की जांच के बाद तैयार की गई विस्तृत रिपोर्ट में कई प्रशासनिक अधिकारियों की भूमिका पर सवाल उठाए गए। रिपोर्ट के आधार पर तत्कालीन जिलाधिकारी कर्मेन्द्र सिंह, तत्कालीन नगर आयुक्त वरुण चौधरी और तत्कालीन एसडीएम अजयवीर सिंह समेत कई अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की संस्तुति की गई। इसके बाद संबंधित अधिकारियों को निलंबित किया गया।सतर्कता विभाग को सौंपी गई जांचमामले की गंभीरता को देखते हुए इसकी जांच सतर्कता विभाग (विजिलेंस) को सौंप दी गई है। जांच एजेंसियां पूरे प्रकरण की पड़ताल कर रही हैं और संबंधित अधिकारियों व कर्मचारियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की प्रक्रिया भी आगे बढ़ाई जा रही है।सरकार का मानना है कि इस मामले में की गई कार्रवाई भ्रष्टाचार के खिलाफ उसकी ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति का स्पष्ट उदाहरण है।

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