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मानसून से निपटने की तैयारियों का मुख्यमंत्री धामी ने लिया जायजा, 13 जिलों में मॉक ड्रिल के बाद अधिकारियों को दिए अहम निर्देश

13 जिलों में मानसून मॉक ड्रिल की सीएम धामी ने की लाइव मॉनिटरिंग, आपदा प्रबंधन को लेकर दिए अहम निर्देशदेहरादून। उत्तराखंड में मानसून के दौरान संभावित आपदाओं से प्रभावी ढंग से निपटने की तैयारियों का आकलन करने के लिए आयोजित राज्य स्तरीय मॉक ड्रिल की मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने राज्य आपातकालीन परिचालन केंद्र (SEOC) से करीब सवा घंटे तक लगातार निगरानी की। इस दौरान उन्होंने प्रदेश के सभी 13 जिलों की तैयारियों की समीक्षा करते हुए अधिकारियों को राहत एवं बचाव कार्यों में किसी भी प्रकार की लापरवाही न बरतने के निर्देश दिए।मुख्यमंत्री ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से सभी जिलों के इंसीडेंट कमांडरों से सीधा संवाद किया और विभिन्न आपदा परिदृश्यों में किए जा रहे रेस्क्यू ऑपरेशन, घायलों के उपचार, संसाधनों की उपलब्धता तथा आपदा की सूचना मिलने के बाद की जा रही त्वरित कार्रवाई की जानकारी ली।समीक्षा के दौरान बागेश्वर में भारी वर्षा की स्थिति, चम्पावत में शारदा नदी के बढ़ते जलस्तर, उत्तरकाशी के नेताला क्षेत्र में राहत अभियान, रुद्रप्रयाग के नरकोटा में भूस्खलन तथा केदारनाथ पैदल मार्ग पर मलबा आने जैसी परिस्थितियों का भी लाइव मूल्यांकन किया गया। मुख्यमंत्री ने कहा कि मानसून के दौरान सभी विभाग आपसी समन्वय के साथ तेजी से कार्रवाई करें और जन-धन की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दें।मॉक ड्रिल के दौरान आपदा प्रबंधन में उपयोग होने वाले कई आधुनिक उपकरणों का भी प्रदर्शन किया गया। इनमें इमेजिंग कैमरा, विभिन्न प्रकार के हाइड्रोलिक कटर, अंडरवाटर कम्युनिकेशन सिस्टम, अंडरवाटर ड्रोन और सोनार सिस्टम जैसे अत्याधुनिक संसाधन शामिल रहे, जिनकी सहायता से राहत एवं बचाव कार्यों को अधिक प्रभावी बनाया जा सकता है।समीक्षा बैठक में मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि बरसात के मौसम में दुर्घटना का कारण बन सकते सूखे और जर्जर पेड़ों की पहचान कर उन्हें प्राथमिकता के आधार पर हटाया जाए। उन्होंने आपदा प्रबंधन एवं पुनर्वास विभाग को इस संबंध में आवश्यक दिशा-निर्देश जारी करने के लिए भी कहा।इसके अलावा प्रदेश के सभी सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) का सुरक्षा ऑडिट कराने और उनकी संरचनात्मक तथा परिचालन सुरक्षा सुनिश्चित करने के निर्देश भी दिए गए।मुख्यमंत्री ने जिलाधिकारियों से कहा कि वे जनप्रतिनिधियों के साथ नियमित बैठकें करें और उन्हें आपदा प्रबंधन की तैयारियों में सहभागी बनाएं। उन्होंने अधिकारियों को जनता के बीच जाकर संवाद स्थापित करने, समय पर चेतावनी और आवश्यक जानकारी उपलब्ध कराने तथा नगर निकाय, पंचायत और तहसील स्तर पर जनजागरूकता कार्यक्रम आयोजित करने के निर्देश दिए।उन्होंने कहा कि आपदा प्रबंधन केवल प्रशासनिक जिम्मेदारी नहीं, बल्कि जनविश्वास से जुड़ा विषय है। इसलिए राहत एवं बचाव कार्यों में संवेदनशीलता, पारदर्शिता और त्वरित निर्णय को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जानी चाहिए।

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