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हिमालय दिवस पर चिंता: ऊंचाई वाले इलाकों में बढ़ती गर्मी से पिघल रही बर्फ, भविष्य के लिए बढ़ा खतरा

हिमालय दिवस: हिंदूकुश क्षेत्र में घटता हिम भंडार बढ़ा रहा चिंता, जलस्रोतों पर मंडराया खतरा

हिमालयी क्षेत्र में बदलते मौसम का असर अब पहाड़ों पर जमा होने वाली बर्फ पर भी दिखाई देने लगा है।
हिंदूकुश हिमालय में लगातार तीसरे वर्ष सामान्य से कम बर्फबारी दर्ज की गई है।
इतना ही नहीं, ऊंचाई वाले क्षेत्रों में बर्फ के टिके रहने की अवधि में भी कमी देखी जा रही है।
विशेषज्ञों के अनुसार यह स्थिति हिमालयी पारिस्थितिकी तंत्र के लिए गंभीर संकेत मानी जा रही है।
सर्दियों में पहाड़ों पर जमा होने वाली बर्फ प्राकृतिक जल भंडार की महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
गर्मियों में यही बर्फ धीरे-धीरे पिघलकर नदियों और जलस्रोतों के प्रवाह को बनाए रखने में मदद करती है।
लेकिन बर्फबारी में कमी और उसके जल्दी पिघलने से इस प्राकृतिक जल भंडार पर दबाव बढ़ रहा है।
इसका असर आने वाले समय में पहाड़ी क्षेत्रों के साथ मैदानी इलाकों के जल संसाधनों पर भी पड़ सकता है।
विशेष चिंता 3000 मीटर से अधिक ऊंचाई वाले क्षेत्रों में बढ़ते तापमान को लेकर है।
तापमान में बदलाव से हिमपात के पैटर्न और बर्फ के टिकाव की अवधि प्रभावित हो रही है।
हिमालयी नदियों और उनसे जुड़े जलस्रोतों के लिए भी यह बदलाव महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
जलवायु परिवर्तन के बढ़ते प्रभावों के बीच हिमालयी क्षेत्र की निगरानी और संरक्षण की जरूरत बढ़ गई है।
विशेषज्ञों का मानना है कि बर्फ और ग्लेशियरों में हो रहे बदलावों पर लगातार वैज्ञानिक अध्ययन जरूरी है।
इसके साथ ही जल संरक्षण और स्थानीय पारिस्थितिकी को मजबूत करने के प्रयास भी तेज करने होंगे।
हिमालय दिवस के अवसर पर सामने आ रही यह तस्वीर हिमालय के बदलते स्वरूप को लेकर नई चिंता पैदा करती है।
आने वाले वर्षों में इन बदलावों का असर जल सुरक्षा, कृषि और पर्वतीय जीवन पर भी पड़ सकता है।
ऐसे में हिमालय को बचाने के लिए पर्यावरण संरक्षण के साथ जल संसाधनों के सतत प्रबंधन पर ध्यान देना जरूरी है।

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