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Land Border District SPs Conference-2026: गृह मंत्री अमित शाह के साथ जुटे देशभर के एसपी, उत्तराखण्ड का भी प्रतिनिधित्व

अमित शाह की अध्यक्षता में पहली राष्ट्रीय सीमा सुरक्षा एसपी कॉन्फ्रेंस आयोजित, उत्तराखण्ड पुलिस ने साझा किया अपना मॉडलनई दिल्ली/देहरादून। देश की सीमाओं की सुरक्षा को और अधिक मजबूत बनाने के उद्देश्य से केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की अध्यक्षता में 9 जुलाई 2026 को नई दिल्ली में पहली ‘Land Border District SPs Conference-2026’ का आयोजन किया गया। इस राष्ट्रीय सम्मेलन में 18 सीमावर्ती राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के पुलिस महानिदेशक, सीमावर्ती जिलों के पुलिस अधीक्षक, केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों के वरिष्ठ अधिकारी तथा विभिन्न केंद्रीय सुरक्षा एजेंसियों के प्रतिनिधि शामिल हुए।बैठक के दौरान सीमा सुरक्षा से जुड़े कई अहम मुद्दों पर विस्तार से विचार-विमर्श किया गया। इनमें सीमा पार आतंकवाद, संगठित अपराध, अवैध धन के नेटवर्क, वित्तीय अपराध, सीमावर्ती क्षेत्रों में बदलती जनसांख्यिकी और स्थानीय लोगों की भागीदारी के माध्यम से सीमा विकास जैसे विषय प्रमुख रहे।दो अंतरराष्ट्रीय सीमाओं वाले राज्य होने के कारण उत्तराखण्ड ने भी सम्मेलन में अपनी रणनीति और अनुभव साझा किए। राज्य पुलिस की ओर से आधुनिक तकनीक आधारित निगरानी व्यवस्था, सीमा पार होने वाले अपराधों पर प्रभावी नियंत्रण, स्थानीय खुफिया नेटवर्क को मजबूत बनाने, सीमांत क्षेत्रों में बुनियादी सुविधाओं के विस्तार और विभिन्न सुरक्षा एजेंसियों के बीच बेहतर समन्वय पर सुझाव प्रस्तुत किए गए।

सम्मेलन के ‘Community Engagement for Border Development’ सत्र में चम्पावत की पुलिस अधीक्षक रेखा यादव ने उत्तराखण्ड पुलिस की जनसहभागिता आधारित पुलिसिंग मॉडल का प्रस्तुतीकरण किया। उन्होंने बताया कि स्थानीय नागरिकों की भागीदारी से सीमावर्ती इलाकों की सुरक्षा को अधिक प्रभावी बनाया जा सकता है। इसी क्रम में उन्होंने ‘Five Pillars of Community Force Multiplication’ की अवधारणा—विश्वास, सूचना, सहभागिता, क्षमता निर्माण तथा प्रोत्साहन एवं संरक्षण—को विस्तार से रखा।प्रस्तुति के दौरान सीमांत क्षेत्रों में आयोजित होने वाली ‘रात्रि चौपाल’ पहल के सकारात्मक परिणामों का भी उल्लेख किया गया। साथ ही पिथौरागढ़ के गुंजी क्षेत्र में विकसित ‘गुंजी मॉडल’ को पलायन रोकने और लोगों की वापसी सुनिश्चित करने वाले सफल उदाहरण के रूप में प्रस्तुत किया गया।सम्मेलन को संबोधित करते हुए गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि केंद्र सरकार देश की सीमा सुरक्षा व्यवस्था को आधुनिक और तकनीक आधारित बनाने के लिए लगातार कार्य कर रही है। उन्होंने कहा कि ‘स्मार्ट बॉर्डर’ की अवधारणा के तहत सुरक्षा बलों, राज्य सरकारों, जिला प्रशासन और स्थानीय नागरिकों के समन्वय से एक मजबूत सुरक्षा तंत्र विकसित किया जा रहा है।उन्होंने यह भी बताया कि आने वाले तीन वर्षों में नशीले पदार्थों की तस्करी पर प्रभावी रोक लगाने और देश को घुसपैठ से सुरक्षित बनाने के लिए व्यापक रणनीति लागू की जाएगी। साथ ही ‘वाइब्रेंट विलेजेज प्रोग्राम’ के माध्यम से सीमांत गांवों में रोजगार बढ़ाने, पलायन रोकने और सरकारी योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने पर विशेष जोर दिया जाएगा।

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