देहरादून। उत्तराखंड के चिकित्सा शिक्षा निदेशालय में एक गंभीर प्रशासनिक अनियमितता का मामला सामने आया है, जिसमें फर्जी शासनादेश के आधार पर उपनल कर्मियों को न्यूनतम वेतनमान देने की प्रक्रिया आगे बढ़ाए जाने का आरोप है। मामला सामने आने के बाद विभागीय स्तर पर हड़कंप की स्थिति बनी हुई है।जानकारी के अनुसार, एक कथित शासनादेश को आधार बनाकर संबंधित अधिकारियों द्वारा उसे वास्तविक दस्तावेज मानते हुए कार्रवाई की गई। आश्चर्यजनक रूप से दस्तावेज की सत्यता की आधिकारिक पुष्टि किए बिना ही उपनल कर्मियों को समान कार्य के आधार पर न्यूनतम वेतनमान देने की प्रक्रिया प्रारंभ कर दी गई।इस आदेश को विभिन्न उच्चाधिकारियों, जिनमें अपर मुख्य सचिव, सचिव, मंडलायुक्त, जिलाधिकारी एवं विभागाध्यक्ष शामिल हैं, को संबोधित बताया गया है। माना जा रहा है कि यही दस्तावेज चिकित्सा शिक्षा निदेशालय तक भी पहुंचा, जहां उस पर आगे की कार्रवाई की गई।मामले में यह भी सामने आया है कि चिकित्सा शिक्षा विभाग की ओर से दून मेडिकल कॉलेज प्रशासन को भी इस कथित शासनादेश के अनुपालन से संबंधित पत्र भेजा गया। इसमें उपनल के अंतर्गत कार्यरत कर्मचारियों को वेतनमान देने की प्रक्रिया अपनाने का संकेत दिया गया था।दून मेडिकल कॉलेज में वर्तमान में उपनल के माध्यम से बड़ी संख्या में कर्मचारी कार्यरत हैं। यदि समय रहते कुछ अधिकारियों द्वारा सतर्कता नहीं बरती जाती, तो इस आदेश के आधार पर वहां भी वेतनमान से जुड़ी प्रक्रिया आगे बढ़ सकती थी।सूत्रों के अनुसार, दस्तावेज में उल्लिखित अधिकारियों की नियुक्ति और वैधता की जांच तक नहीं की गई, जिससे पूरे प्रकरण पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। आशंका जताई जा रही है कि इस तरह के फर्जी आदेश अन्य विभागों तक भी पहुंचे हो सकते हैं या भेजे जाने की प्रक्रिया में हो सकते हैं।फिलहाल मामले की गंभीरता को देखते हुए संबंधित स्तर पर जांच और स्पष्टीकरण की प्रक्रिया शुरू होने की संभावना जताई जा रही है।
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उपनल कर्मियों के वेतन को लेकर फर्जी शासनादेश का मामला सामने आने से मचा हड़कंप
June 16, 2026
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