उत्तरकाशी। मानसून सीजन के दौरान संभावित भूस्खलन और प्राकृतिक आपदाओं से निपटने के लिए जिला प्रशासन ने तैयारियां तेज कर दी हैं। आपदा प्रबंधन एवं पुनर्वास मंत्री मदन कौशिक ने जनपद दौरे के दौरान अधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक कर सभी विभागों को समय रहते आवश्यक व्यवस्थाएं सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।बैठक में मंत्री ने कहा कि पर्वतीय क्षेत्रों में बरसात के दौरान सड़कें बाधित होने और गांवों का संपर्क टूटने की घटनाएं आम हैं। ऐसे में दूरस्थ क्षेत्रों में खाद्यान्न, रसोई गैस, ईंधन तथा आवश्यक जीवनरक्षक दवाओं का अग्रिम भंडारण सुनिश्चित किया जाए, ताकि किसी भी आपात स्थिति में लोगों को दिक्कतों का सामना न करना पड़े।उन्होंने राष्ट्रीय राजमार्ग, लोक निर्माण विभाग और पीएमजीएसवाई के अधिकारियों को निर्देशित किया कि ऐसे सभी मार्गों की पहचान की जाए जहां भूस्खलन या सड़क अवरुद्ध होने की संभावना अधिक रहती है। इन स्थानों पर पहले से ही जेसीबी और पोकलैंड मशीनें तैनात रखी जाएं, ताकि मार्ग बंद होने की स्थिति में तुरंत यातायात बहाल किया जा सके।स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर भी विशेष निर्देश दिए गए। मुख्य चिकित्सा अधिकारी को कहा गया कि दुर्गम क्षेत्रों के नजदीकी स्वास्थ्य केंद्रों में पर्याप्त चिकित्सक और आवश्यक संसाधन उपलब्ध रहें। वहीं जल संस्थान और विद्युत विभाग को भी बारिश के दौरान निर्बाध सेवाएं बनाए रखने के लिए पर्याप्त बैकअप व्यवस्था रखने को कहा गया।यात्रियों की सुरक्षा और सुविधा को प्राथमिकता देते हुए मंत्री ने निर्देश दिए कि आपदा की स्थिति में सड़क बंद होने पर आसपास संचालित होटल, ढाबों और दुकानों में मूल्य सूची अनिवार्य रूप से प्रदर्शित की जाए, ताकि किसी प्रकार की मनमानी वसूली न हो। इसके अलावा राहत शिविरों और आपदा शेल्टरों में सभी मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध रखने के निर्देश भी दिए गए।जिलाधिकारी प्रशांत आर्य ने बैठक में बताया कि जनपद में 25 संवेदनशील स्थानों को चिह्नित किया गया है। इन क्षेत्रों में त्वरित राहत एवं सड़क खोलने के लिए 60 से अधिक जेसीबी और पोकलैंड मशीनें तैनात की गई हैं। आपदा की स्थिति में लोगों को सुरक्षित ठहराने के लिए 68 विद्यालयों को अस्थायी शेल्टर होम के रूप में चिन्हित किया गया है।उन्होंने बताया कि राहत एवं बचाव कार्यों के लिए एसडीआरएफ की छह और एनडीआरएफ की दो टीमें सक्रिय रखी गई हैं। साथ ही आपातकालीन परिस्थितियों में हवाई सहायता उपलब्ध कराने के लिए जिले के 19 हेलीपैड पूरी तरह तैयार हैं, जबकि 53 अतिरिक्त स्थलों को भी हेलीपैड के रूप में उपयोग के लिए चिह्नित किया गया है।मदन कौशिक ने कहा कि जनपद भौगोलिक दृष्टि से आपदा की दृष्टि से अत्यंत संवेदनशील है। ऐसे में सभी विभागों को बेहतर समन्वय और त्वरित प्रतिक्रिया के साथ कार्य करना होगा। उन्होंने कहा कि प्रशासन का मुख्य उद्देश्य आपदा के दौरान जनहानि और संपत्ति के नुकसान को न्यूनतम रखना है।बैठक में जिला पंचायत अध्यक्ष रमेश चौहान, जिलाधिकारी प्रशांत आर्य, विधायक सुरेश चौहान, दर्जा राज्य मंत्री प्रताप पंवार, भाजपा जिलाध्यक्ष नागेंद्र चौहान, विधायक विजयपाल सजवान, भाजपा प्रदेश उपाध्यक्ष डॉ. स्वराज विद्वान, भाजपा नेता पवन नौटियाल, शशिकांत नेगी सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी मौजूद रहे।
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मानसून से पहले प्रशासन अलर्ट मोड में, 25 संवेदनशील स्थलों पर भारी मशीनें तैनात करने की तैयारी
June 26, 2026
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