Sarthak PahalSearch for Home/उत्तराखंडउत्तराखंडदेश-विदेशशिक्षासामाजिकरोज सामूहिक प्रार्थना करने से परिवार में प्रेम, विश्वास और एकता मजबूत होगी : चिदानंद सरस्वतीPhoto of Web Editor Web Editor Send an email16 hours ago0 336 1 minute readचिदानन्द सरस्वतीListen to this articleऋषिकेश, 16 जून। परमार्थ निकेतन के पावन गंगा तट पर आयोजित 34 दिवसीय श्रीराम कथा के 33वें दिवस पर पूज्य स्वामी चिदानन्द सरस्वती ने परिवार, संस्कार, सनातन संस्कृति और पर्यावरण संरक्षण के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि घर केवल ईंट और पत्थरों से नहीं, बल्कि संस्कृति, संस्कार, प्रेम और आध्यात्मिक मूल्यों से बनता है।अधिमास की पूर्णता के बाद शुभ कार्यों के लिए श्रेष्ठ समयस्वामी चिदानन्द सरस्वती ने कहा कि अधिमास की पूर्णता के बाद शुभ कार्यों के लिए श्रेष्ठ समय प्रारंभ हो चुका है। यह केवल तिथियों का परिवर्तन नहीं, बल्कि जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने का अवसर भी है। उन्होंने श्रद्धालुओं से समाज, संस्कृति और राष्ट्रहित में संकल्प लेने का आह्वान किया।संसार की सबसे बड़ी शक्ति प्रभु के चरणों में निहित है : चिदानंदरामायण के प्रसंग का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि महान योद्धा राजा बाली ने भी अपने अंतिम समय में पुत्र अंगद को भगवान श्रीराम के चरणों में समर्पित किया था। इससे स्पष्ट होता है कि संसार की सबसे बड़ी शक्ति प्रभु के चरणों में ही निहित है। उन्होंने कहा कि सनातन संस्कृति और परंपराओं के संरक्षण के लिए बच्चों को आधुनिक शिक्षा के साथ आध्यात्मिक और नैतिक शिक्षा देना आवश्यक है। नई पीढ़ी जब प्रभु के आदर्शों को अपनाएगी, तभी संस्कृति और सभ्यता सुरक्षित रह सकेगी।घर केवल ईंट-पत्थरों से नहीं, संस्कारों से बनता है स्वामी जी ने परिवारों से प्रतिदिन सामूहिक प्रार्थना करने का आग्रह करते हुए कहा कि इससे परिवार में प्रेम, विश्वास और एकता मजबूत होती है। उन्होंने कहा कि भव्य भवन होने के बावजूद यदि उसमें संस्कार, सम्मान और आध्यात्मिकता नहीं है, तो वह केवल मकान है, घर नहीं। कथा के दौरान पर्यावरण संरक्षण का भी संदेश दिया गया। लाखों पौधों के रोपण और संरक्षण का संकल्प लेते हुए स्वामी जी ने कहा कि वृक्ष जीवन के रक्षक हैं और प्रत्येक व्यक्ति को कम से कम एक पौधा लगाकर उसका संरक्षण करना चाहिए।कथा व्यास संत श्री मुरलीधर जी ने कहा कि कथा अपने अंतिम चरण में है, लेकिन इसके माध्यम से लिए गए संस्कार, संस्कृति संरक्षण और पर्यावरण सुरक्षा के संकल्प समाज में सकारात्मक परिवर्तन की नई चेतना का आधार बनेंगे।
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सामूहिक प्रार्थना से परिवारों में बढ़ती है सकारात्मकता और आपसी सामंजस्य : स्वामी चिदानंद सरस्वती
June 17, 2026
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