पवित्र कैलाश मानसरोवर यात्रा के लिए इस वर्ष आवेदन प्रक्रिया शुरू हो चुकी है, जिसकी अंतिम तिथि 19 मई 2026 निर्धारित की गई है। इस बार यात्रियों की संख्या बढ़ाने के साथ-साथ यात्रा खर्च में भी इजाफा किया गया है।
इस साल यात्रा पर जाने वाले श्रद्धालुओं को लगभग 2.09 लाख रुपये प्रति व्यक्ति खर्च करने होंगे, जो पिछले वर्ष के करीब 1.74 लाख रुपये की तुलना में लगभग 35 हजार रुपये अधिक है। खर्च बढ़ने का मुख्य कारण डॉलर की कीमत में वृद्धि, हवाई किराए और लॉजिस्टिक्स लागत में बढ़ोतरी बताया गया है।
सरकारी मार्ग से यात्रा करने पर विदेश मंत्रालय भारत द्वारा आयोजित लिपुलेख दर्रा रूट से खर्च करीब 2.09 लाख रुपये प्रति व्यक्ति रहेगा। वहीं नाथू ला मार्ग से यात्रा करने पर यह खर्च लगभग 3.31 लाख रुपये तक पहुंच जाता है। यदि यात्री निजी ऑपरेटरों के जरिए काठमांडू या नेपालगंज मार्ग से जाते हैं, तो पैकेज 3 से 3.5 लाख रुपये तक हो सकता है।
यात्रा जून से अगस्त 2026 के बीच आयोजित की जाएगी। इस वर्ष कुल 20 बैच भेजे जाएंगे, जिनमें प्रत्येक बैच में 50 यात्री शामिल होंगे। पूरी यात्रा लगभग 22 दिनों की होगी। आवेदन केवल भारतीय नागरिक ही कर सकते हैं, जिनकी आयु 18 से 70 वर्ष के बीच हो और जिनके पास वैध पासपोर्ट हो।
यात्रा की भारतीय हिस्से की व्यवस्थाएं कुमाऊं मंडल विकास निगम द्वारा की जाती हैं, जिसके लिए इस बार प्रति यात्री 65 हजार रुपये शुल्क निर्धारित किया गया है। केएमवीएन के महाप्रबंधक विजय नाथ शुक्ला के अनुसार, यह शुल्क आवास, भोजन, गाइड और अन्य व्यवस्थाओं के लिए लिया जाता है, जबकि तिब्बत क्षेत्र में होने वाले खर्च, वीजा और अन्य शुल्क अलग से डॉलर में देय होते हैं।
इतिहास की बात करें तो यह यात्रा भारत की स्वतंत्रता के बाद 1947 में शुरू हुई थी, लेकिन भारत-चीन युद्ध 1962 के दौरान इसे बंद कर दिया गया था। बाद में 1981 में इसे फिर शुरू किया गया और 2019 तक जारी रही। कोविड-19 और भारत-चीन तनाव के कारण कुछ वर्षों तक बंद रहने के बाद 2025 में यात्रा को दोबारा शुरू किया गया।
अब यह यात्रा चंपावत और टनकपुर होते हुए कराई जा रही है, जिसमें श्रद्धालुओं को जागेश्वर और चितई गोलू देवता मंदिर जैसे धार्मिक स्थलों के दर्शन का अवसर भी मिलता है।





