
देहरादून। स्वतंत्रता संग्राम सेनानी आश्रितों के नाम पर कथित रूप से तैयार किए गए फर्जी प्रमाणपत्रों के मामले में जिला प्रशासन ने कार्रवाई करते हुए दो लेखपालों को निलंबित कर दिया है। जांच समिति की रिपोर्ट के आधार पर जिलाधिकारी डा. आशीष चौहान ने लेखपाल जगदीश राठौड़ और डिंपल के खिलाफ निलंबन की कार्रवाई की।
लेखपालों के निलंबन के बाद उत्तराखंड लेखपाल संघ ने इसका विरोध शुरू कर दिया है। बुधवार को तहसील सदर स्थित लेखपाल सभागार में प्रदेश अध्यक्ष देवेश घिल्डियाल की अध्यक्षता में संघ की आपात बैठक हुई। बैठक में देहरादून जिला इकाई ने 25 सितंबर से प्रमाणपत्रों से संबंधित कार्यों का बहिष्कार करने का फैसला लिया।
दस्तावेजों के आधार पर रिपोर्ट देने का तर्क
संघ पदाधिकारियों के अनुसार मैदानी क्षेत्रों में लेखपालों पर काम का काफी दबाव है। एक लेखपाल की आईडी पर प्रतिदिन बड़ी संख्या में प्रमाणपत्र संबंधी आवेदन पहुंचते हैं। आवेदन के साथ उपलब्ध कराए गए दस्तावेजों की जांच के आधार पर ही लेखपाल अपनी रिपोर्ट तैयार करते हैं।
संघ का तर्क है कि यदि आवेदक या किसी अन्य माध्यम से कूटरचित दस्तावेज अपलोड किए गए हैं तो केवल लेखपाल को इसके लिए जिम्मेदार ठहराना उचित नहीं है। संगठन ने पूरे प्रकरण में आवेदकों के साथ-साथ जन सुविधा केंद्र संचालकों और फर्जी दस्तावेज तैयार करने में शामिल अन्य लोगों की भूमिका की भी जांच कराने की मांग की है।
अतिरिक्त क्षेत्रों का भी संभाल रहे जिम्मा
लेखपाल संघ ने कहा कि कई कर्मचारियों के पास उनके मूल क्षेत्र के साथ अतिरिक्त क्षेत्रों की जिम्मेदारी भी है। इसके बावजूद प्रमाणपत्रों सहित राजस्व से जुड़े अन्य कार्य लगातार किए जा रहे हैं। संघ का कहना है कि काम के अत्यधिक दबाव के बीच दस्तावेजों की वास्तविकता का पता लगाने की जिम्मेदारी केवल लेखपालों पर डालना उचित नहीं है।
प्रदेश अध्यक्ष देवेश घिल्डियाल ने कहा कि यदि कूटरचित दस्तावेजों के आधार पर जारी प्रमाणपत्रों के मामलों में लेखपालों के खिलाफ लगातार दंडात्मक कार्रवाई की जाती है तो संगठन प्रदेश के मैदानी क्षेत्रों में प्रमाणपत्र संबंधी कार्यों का व्यापक बहिष्कार करने को मजबूर होगा।
बैठक में प्रदेश महामंत्री मेजर सिंह चौहान, उपाध्यक्ष मंजू बिष्ट और उम्मेद सिंह, संगठन मंत्री रविंद्र दत्त सेमवाल सहित कई पदाधिकारी मौजूद रहे। हरिद्वार और ऊधम सिंह नगर से आए पदाधिकारियों ने भी बैठक में हिस्सा लिया।
MBBS प्रकरण की अलग-अलग स्तर पर जांच
फर्जी प्रमाणपत्र से जुड़े इस प्रकरण की जांच कई स्तरों पर चल रही है। पुलिस की ओर से गठित एसआईटी की जांच एसपी देहात जया बलोनी के नेतृत्व में की जा रही है। वहीं, जिला प्रशासन की विभागीय जांच सीडीओ अभिनव शाह के निर्देशन में चल रही है।
प्रकरण को लेकर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने भी डीजीपी को उच्चस्तरीय जांच कर दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। जिला प्रशासन की जांच समिति ने विभागीय जांच के दौरान दोनों लेखपालों की भूमिका को जिम्मेदार मानते हुए उनके निलंबन की संस्तुति की थी, जिसके बाद जिलाधिकारी ने कार्रवाई की।
मामले में एसडीएम स्तर के एक अधिकारी की भूमिका को लेकर भी जांच में सवाल उठाए गए हैं। हालांकि, प्रकरण से जुड़े अन्य पहलुओं की जांच अभी जारी है।



